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Saturday, October 13, 2018

ढल चुकी रात मुलाक़ात कहाँ सो जाओ | Sad Shayari by Rekhta

ढल चुकी रात मुलाक़ात कहाँ सो जाओ
सो गया सारा जहाँ सारा जहाँ सो जाओ 

सो गए वहम-ओ-गुमाँ वहम-ओ-गुमाँ सो जाओ
सो गया दर्द-ए-निहाँ दर्द-ए-निहाँ सो जाओ 

कब तलक दीदा-ए-नम दीदा-ए-नम दीदा-ए-नम
कब तलक आह-ओ-फ़ुग़ाँ आह-ओ-फ़ुग़ाँ सो जाओ 

आह अब टूट चला टूट चला टूट चला
आह ये रिश्ता-ए-जाँ रिश्ता-ए-जाँ सो जाओ 

उठ चले दिल के मकीं दिल के मकीं दिल के मकीं
लुट गया सारा मकाँ सारा मकाँ सो जाओ 

जावेद कमाल रामपुरी

ढल चुकी रात | सारा जहाँ सो जाओ